INTERNASHOKUNAL

NPO निगम इन्तेर्नाशोकुनल , एक ऐसी संस्था है जो विभिन संस्कृतियों तथा उनकी विशेषताओ के साथसाथ उनके खान पान के ढंग का अध्ययन करते हुए एक अग्रसर हैं जहाँ भिन्न भिन्न संस्कृतियों के लोग भिन्न भिन्न खाद्य पदार्थो का आनंद ले सकें .

उद्देश ्य
हमारा उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना हैं जहाँ सभी लोग अपने अपने खाद्य संकृति से परे , धर्म , विश्वास , परम्पराओं से बाध्य होकर “ धार्मिक विश्वासों के कारण न खाए जाने वाले भोज्य पदार्थ, या अन्य किसी कारणवश संस्कृतियों के स्वादिष्ट भोजन का लुत्फ़ उठा सके .

संस ्थ ा की उत्पत्ति
वर्ष 2005 में किकुचि नाम के पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया. उस वक्त किकुचि को यह एहसास हुआ कि उस अरबी व्यक्ति के लिए, जो सूअर का मांस नहीं खा सकता था , एक ऐसे जापानी भोजनालय उस व्यक्ति का मनचाहा भोजन मिल सके . . किकुइके के कितने समझाने के बावजूद भी उस व्यक्ति ने जब तक स्वयं तसल्ली नहीं की तब तक वो कुछ भी नहीं खा सका. फिर किकुचि ने यह निर्णय किया कि वो विश्वविद्यालय के पर्व में जहाँ बहुत सारे विदेशी छात्र भी होते हैं , वहां वो अंग्रेजी व अन्य भाषाओं में खाद्य - सामग्रियों को भी दर्शायेगा . साथ ही साथ भाषाओँ में विविधिता होने के कारण उसने सामग्रियों को चित्रों के द्वारा भी दर्शाने का निर्णय लिया और पर्व के दौरान उसने इस चित्र सरणी को रेस्तरां एवं कार्यक्रम के मीनू में भी शामिल किया . इसके अलावे विदेशी लोगों के साथ - साथ जापानी लोग भी खान पान की संस्कृतियों को नजदीक से समझ पाएँ, इसके लिए किकुचि ने स्कूलों एवं अन्य विभिन्न संसथानों में वर्कशॉप

पृष ्टभूम ि
वर्तमान में , जापान में विदेशी छात्रों की संख्या 21 लाख 5 हजार एवं प्रति वर्ष जापान में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 92 लाख तक बढ़ गई हैं . इसके अलवाए , भोज्य पदार्थों की एलर्गी से ग्रसित जापानी बच्चों की संख्या 6 लाख ( कुल बच्चों की संख्या का 10%) और 24 लाख वयस्क ( कुल वयस्कों का 2%) इस खाद एलर्जी से ग्रसित हैं , ये संख्या गत वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ी हैं .
कई विश्वासों तथा आस्थाओं के होने के कारण बाहर भोजन करने के वक़्त या किसी सभा में भोजन करने के वक़्त हमें इन खाद्य बन्धनों के कारण कई समस्याएँ देखने को मिलती हैं .घर पर खाना बनाने के ऐसे समन्वित समाज के लक्ष्य की ओर न खाए जा सकने वाले भोज्य पदार्थों के बंधन से मुक्त होकर विभिन्न विश्वविद्यालय के छात्र ने एक अरबी व्यक्ति के साथ ओसाका के कई को ढूँढना कितना मुश्किल हैं जहाँ का भी आयोजन किया . वक़्त भी , कई बार कुछ विशेष सामग्रियों को हम किसी विशेष दुकान से ही खरीदते हैं जिसके फलस्वरूप खाने के विकल्प कम होने के कारण असंतुलित आहार लेने से पोषक तत्वों की कमी हो जाती हैं और इसका परिणाम हमारे स्वास्थ्य पर होता हैं . कई बार किसी नए खाद्य पदार्थ के बारे में जानकारी न होने के कारण भी हमें समस्याएँ होती हैं .

प्रोजेक ्ट
निर्म ाण परियोजना
इस प्रोजेक्ट में हम अंतर्राष्ट्रीय रूप में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के चित्र बनाते हैं . इस प्रोजेक्ट में हम इन बातों पर खास ध्यान देतें हैं कि अन्य वस्तु विशेष के स्तर से परे एक ऐसी सारणी का निर्माण करें जो जापानी लोगों के साथ - साथ विदेशी लोगों , छोटे बच्चों जिन्हें जापानी चित्रलिपि नहीं आती या वृद्ध लोगों को, जिनकी दृष्टि क्षमता कम होती हैं, उन्हें इन सारणियों को समझने में कोई तकलीफ न हो .
विस्त ार परियोजना
इस प्रोजेक्ट के द्वारा हम खाद्य पदार्थों के चित्रों की प्रदर्शनियों का आयोजन करते हैं . दूसरे शब्दों में कहें तो हम इन चित्रों को किसी अंतर्राष्ट्रीय सभास्थली या फिर अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों , पर्यटक स्थलों , स्कूलों या किसी विपदा से ग्रषित शरणार्थियों को विवरण देने के वक़्त उपयोग में लाते हैं . इसके साथ ही हम इन खाद्य पदार्थों के चित्रों को प्रदर्शित करते हुए लोगों में उपयोगिता एवं महत्व से सम्बंधित जानकारी का भी सर्वेक्षण करते हैं .
अभ्यास परियोजना
इस परियोजना के तहत हम भिन्न भिन्न देशों से इकट्ठे किये हुए , भोज्य पैकेटों का उपयोग करते हुए विविध संस्कृतियों को समझने के लिए उपयोगी वर्कशॉप का स्कूलों . विश्वविद्यालयों , व्यावासिक संगठनों और आम जनता के बीच भी आयोजन करते हैं . देश के विभिन्न अध्यन संस्थानों में ऐसे वर्कशॉप आयोजन करने के लिए हम ऐसे भोज्य पैकेटों को इकठ्ठा करते हैं .

foodpicto.png  hirogeru.jpg